"It seems to me I am trying to tell you a dream-making a vain attempt, because no relation of a dream can convey the dream sensation, that commingling of absurdity, surprise,, and bewilderment in a tremor of struggling revolt, that notion of being captured by the incredible which is of the very essence of dreams. No, it is impossible, it is impossible to convey the life-sensation of any given epoch of one's existence-that which makes its truth, its meaning-its subtle and penetrating essence. It is impossible. We live, as we dream-alone".
------------- Joseph Conrad in "Heart of Darkness"


Copyright © 2007-present:Blog author holds copyright to original articles, photographs, sketches etc. created by her. Reproduction including translations, roman version /modification of any material is not allowed without prior permission. But if interested, leave a note on comment box. कृपया बिना अनुमति के इस ब्लॉग से कुछ उठाकर अपने ब्लॉग/अंतरजाल की किसी साईट या फ़िर प्रिंट मे न छापे.

Mar 25, 2009

हज़ार इच्छाए लिए सूरज फ़िर उगता है..........

दिन है कि ख़त्म नही होता,
एक चक्की की धूरी  में बीतती है उम्र
रोशनी के बिना दिन
और नींद से बोझिल राते
दो नन्ही कोपलों की हरियाली से
मन फ़िर भी हरा है........

स्वप्न अब भी आते है,
और स्वप्न में, मैं माँ नही
बल्कि अक्सर बच्ची हो जाती हूँ
स्नेह की स्मृति से सराबोर
हज़ार इच्छाए लिए सूरज  फ़िर उगता है..........

11 comments:

  1. very nice and expressive, nostalgic

    ReplyDelete
  2. कैसे-कैसे मन. मन के कैसे-कैसे तन, धन.
    स्‍नेहसड़क पर पीछे दूर कहीं एक हमारी साइकिल की संगत भी समझियेगा.

    ReplyDelete
  3. हज़ार इच्छाए लिए सुरज फ़िर उगता है..........
    यही तो जिंदगी है।

    ReplyDelete
  4. हर माँ के साथ यही होता होगा ..सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  5. स्वप्न अब भी आते है,
    और स्वप्न मे, मैं माँ नही
    बल्कि अक्सर बच्ची हो जाती हूँ
    स्नेह की स्मृति से सरोबार
    हज़ार इच्छाए लिए सुरज फ़िर उगता है..........
    aashawadi sunder bhav

    ReplyDelete
  6. प्राकृतिक रचना को शब्दों के माध्यम से सुन्दरता के साथ सजाया है ।

    ReplyDelete
  7. हज़ार इच्छाए लिए सुरज फ़िर उगता है..........!
    सुखद अनुभूति /आशा की कविता !

    ReplyDelete
  8. सच कहा आपने... हर रोज़ उगते नए सूरज के साथ नई नई हज़ारों इच्छाएँ भी उगने लगती है... यही अनगिनत इच्छाएँ सपनीली दुनिया मे ले जाती है जो मन को असीम सुख से भर देती है.

    ReplyDelete
  9. हजार फूलों की तरह खिलने दीजिए हजार सूरजों को । भले ही इच्छाएं अक्सर मूर्खतापूर्ण हों , तब भी ।

    ReplyDelete

असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।