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May 6, 2009

बारिश मे गुजरते हुए


बारिश और बारिश
धुंध और कोहरे के दिन
बहुत पुराना रिश्ता है
धुंध, कोहरे और बारिश से मेरा
बारिश मे ये शहर एक शहर नही रहता
समय और काल के पार घुलमिल जाता है
कई दूसरे शहरो से .....................


कभी बारिश मे गुजरते हुए
कई बारिशो की याद युं उठ आती है अचानक
जैसे पहली बारिश के बाद
उठ आती थी मिट्टी की खुशबू
सील जाती थी माचीस की तीली
और बंद पड़े डिब्बे मे चीनी .....


या सर उठाती है इच्छा
गरमागरम चाय की
या फ़िर जैसे जहन मे देर सबेर
कौंध जाती है
एक मटमैली नदी
और पंक्तिया उन कविताओ की
जो मुडी-तुडी शक्ल मे
किसी जेब से निकलती थी ....................

बारिश के बीच बारिश की स्मृति
कुछ यु भी आती है
जैसे बचते-बचाते
चप्पल के नीचे जाता था एक केचुआ
जीवन और मृत्यु
पाप और पुण्य का फैसला सुनाने
और एक लिजलिजापन भीतर तक उतर जाता था......

बारिश के बीच याद आती है,
बहुत सी सर्द और गर्मजोशी से
लबालब मुलाकाते
और वों बहुत से दोस्त
जिनका पता -ठिकाना खो गया है..................


और बारिश के बाद के बहुत सुकूनदेह है
घुले-घुले और धुले से सन्नाटे मे
गीली धुप और वों कुछ ठहरे हुए पल
जो स्मृति से उबर गए है
और भागम-भाग से बचे हुए है.....

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर.

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  2. मंत्रमुग्ध कर देने वाली रचना

    ---
    चाँद, बादल और शाम

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  3. बारिश व उससे जनित भावनाओं का बहुत सुन्दर चित्रण किया है।
    घुघूती बासूती

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  4. सबके जीवन में वर्षा की सरस बूंदें और फुहारें पड़ें !

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  5. भूली बिसरीं यादें -नोस्टाल्जिया !

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  6. jaise barish ke sath pura jeevan ji liya .
    bhut sundar abhivkti.
    badhai

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  7. बारिश के साथ
    भीतर कहीं घुमड़ती हैं
    कांच के पीछे
    ढुलकती बूंदों की यादें
    या फिर कोहरे के शॉल को भेदकर
    भीतर तक कंपा देने वाली दिलकश सिहरन

    बारिश के साथ बहता है गहरा एकाकीपन
    धुंधलके में लोहे की बेंच पर
    दुबके हुए खामोश पागल की मानिंद....
    इस अजीब सी दुनिया से
    निकल भागने का तल्ख अहसास

    कभी दूसरे छोर पर कोहर के प्रपात में
    डूबती-उतराती किश्तियों सी
    स्मृतियों की मंद पड़ती लकीरें
    या तेज बारिश के बीच
    मैदान की ओर उतरती बस में
    पहाड़ जैसे दुखों को
    पीछे छोड़ आने की तसल्ली

    और कभी बादलों को ठेलकर
    धूप का कोई जिद्दी टुकड़ा
    शिखरों के सफेद स्कार्फ में
    बिखेर देता उजले रंग
    जैसे सुनाना चाहता हो
    क्षितिज की ओर उड़ते
    पक्षियों का यात्रा वृतान्त....

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