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Jan 28, 2010

बुराँश


करीने लगी कोई क्यारी
या सहेजा हुआ बाग़ नहीं होगा ये दिल
जब भी होगा बुराँश का घना दहकता जंगल ही होगा
फिर घेरेगा ताप,
मनो बोझ से फिर भारी होंगी पलके
मुश्किल होगा लेना सांस
मैं कहूंगी नहीं सुहाता मुझे बुराँश,
नहीं चाहिए पराग....
भागती फिरुंगी, बाहर-बाहर,
एक छोर से दूसरे छोर
फैलता फैलेगा हौले हौले,
धीमे-धीमे भीतर कितना गहरे तक
बुराँश बुराँश ...
******













15 comments:

  1. फैलता है बुरांश भीतर भीतर !

    पता नही कहाँ से घूमते घूमते यहाँ पहुंचा ! आपके ब्लॉग पर

    बेहद गहरे अर्थ सिमटे हुए लगते हैं !
    हर बार पढ़ रहा हूँ तो कुछ और भीतर जाता हूँ! ........कुछ और ....थोडा और समझ पाता हूँ !.....बुरांश का घना दहकता जंगल ही जान पड़ता है !...

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  2. करीने से लगी क्यारी और बुरांश का जंगल! सच में तुलना जबर्दस्त है और पलड़ा तो बुरांश के जंगल का ही भारी पड़ेगा।
    बुरांश को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?
    घुघूती बासूती

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  3. "बुरांश का घना दहकता जंगल"
    बहुत सुना है बुरांश की इस दहकती पहाड़ी आग के बारे मे..मगर कभी देखा नही..मगर इस कविता मे जरूर उसकी तपिश निखर कर आती है..तपिश जो भीतर ही भीतर सुलगती जाती है..ज्यों-ज्यों..

    फैलता है बुरांश भीतर-भीतर

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  4. Rhododendron arboreum is the latin name. For more info click here

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  5. http://swapandarshi.blogspot.com/2009/10/himmalayan-song-from-garhwal.html

    one old post on Buraansh

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  6. I guess Buransh is also the state flower for Uttrakhand/Uttranchal

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    1. DIPENDRA AGRAWALMay 3, 2012 at 8:38 AM

      YES YOU ARE ABSOLUTELY CORRECT, BURANSH IS THE STATE FLOWER OF UTTARAKHAND, BESIDES IT'S JUICE IS VERY GOOD N REFRESHING SOFT DRINK, AND A MARVELOUS MEDICINE FOR HEART, IT'S USERS RARELY OR, NEVER SUFFER FROM HEART PROBLEMS.

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  7. जब भी होगा बुराँश का घना दहकता जंगल ही होगा
    फिर घेरेगा ताप,
    मनो बोझ से फिर भारी होंगी पलके
    मुश्किल होगा लेना सांस ...

    कविता से निकलती तपिश ...... धीरे धीरे आती आँच .......... शब्दों की बैचेनी बहुत कुछ कह रही है ..........

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  8. बुरांश के घने दहकते जंगल में ...धीमे धीमे भीतर ....इसका गहरा लाल रंग ...
    बुरांश का कोई दूसरा नाम भी है क्या ...बहुत सुन्दर लगा यह फूल ...!!

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  9. धीमे-धीमे भीतर कितना गहरे तक
    बुराँश बुराँश ...


    -बहुत गहन!

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  10. एक बार फिर दिल के सबसे करीब बुरांश की कविता पढ़ी वाह।कविता की गहराई

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