Copyright © 2007-present by the blog author. All rights reserved. Reproduction including translations, Roman version /modification of any material is not allowed without prior permission. If you are interested in the blog material, please leave a note in the comment box of the blog post of your interest.
कृपया बिना अनुमति के इस ब्लॉग की सामग्री का इस्तेमाल किसी ब्लॉग, वेबसाइट या प्रिंट मे न करे . अनुमति के लिए सम्बंधित पोस्ट के कमेंट बॉक्स में टिप्पणी कर सकते हैं .

Aug 17, 2010

लौटना पहाड़

लौटना पहाड़

फिर फिर  मन की भूली बिसराई
सर्पीली पनीली हरी संकरी पगडंडी पर होगा
ठीक ठीक किसी भूगोल में नहीं होगा
किसी  समय में नहीं होगा
भटकन की बहत्तर कहानियां घेरेंगी 
कुछ छितरे चमकीले बिम्ब होंगे
कुहासे, धुप और बारिश के बीच
अठखेलियाँ करते

5 comments:

  1. खुली आँखों के सपने .ओर आड़ी तिरछी तस्वीरे ...ओर जिद्दी मन !!

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया भावपूर्ण.

    ReplyDelete
  3. हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. अच्छी कविता !
    सचमुच!

    ReplyDelete

असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।