"It seems to me I am trying to tell you a dream-making a vain attempt, because no relation of a dream can convey the dream sensation, that commingling of absurdity, surprise,, and bewilderment in a tremor of struggling revolt, that notion of being captured by the incredible which is of the very essence of dreams. No, it is impossible, it is impossible to convey the life-sensation of any given epoch of one's existence-that which makes its truth, its meaning-its subtle and penetrating essence. It is impossible. We live, as we dream-alone".
------------- Joseph Conrad in "Heart of Darkness"


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Mar 24, 2011

समय हमारा-दो पाठ




ग्लोबल गाँव अब वर्चुअल संसार है 
सोशल नेटवर्किंग है...
ओलों सी बरसती है सामाजिकता
वैसे ही खत्म होती है कुछ देर बाद 
छोटे छोटे बुलबुलों के बीच बसे है
कई कई 'नेशंस विदाऊट बोर्डर्स' 
लोग बस इत्तेफाक से 
लालबत्ती पर खड़े ट्रेफिक से टकराते है
 बस ज़रा सी देर में निकल भी जाते है
सब तरफ चेहरे....नाम
और पहचान (बहुवचन) के जंगल है
वर्चुअल संसार में पनपती है 
बदलाव की उम्मीद 
इंटरनेट...विकीलीक्स...फेसबुक 
दिखते  नयी चेतना के औज़ार

रीयल वर्ल्ड में 
बिला जाता है सलौना ग्लोबल गाँव
दुनिया फिर बंटी रहती है कई हिस्सों में
खून की नदी बन बहता है पूरा रेगिस्तान 
बहरीन से लीबिया...इराक से अफगानिस्तान
वर्चुअल संसार में उठता है वीडियोगेम्स का रोमांच
ग्लोबल दुनिया में लड़ाई हर कहीं लोकल है 
अपनी अपनी अकेली लड़ाई में टूटता है प्रतिरोध
खत्म होती है हाशिए की अस्मिताएं
सूचना तंत्र के विस्फोट के साथ
पीछे छूटता जाता है रीयल वर्ल्ड
सिर्फ और सिर्फ मुनाफ़ा होता रहता है ग्लोबल 
  


8 comments:

  1. वैसे ही खत्म होती है कुछ देर बाद
    वर्चुअल संसार में पनपती है
    बदलाव की उम्मीद
    इंटरनेट ...फेसबुक दीखते कारगर औज़ार

    आज की परिस्थिति को सटीक लिखा है ..अच्छी प्रस्तुति

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  2. रीयल वर्ल्ड का दिल अभी भी धड़कता है और वह वर्चुअल संसार को भी
    अपने आपमें आत्मसात कर लेना चाहता है... आज यही जद्दोजहद चल रही है...

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  3. नमस्ते सुषमा, 'समय हमारा' बहुत ही अच्छी कविता है। अपने समय की नब्ज को पकड़्ती और प्रकट करने वाली। बधाई। यह न केवल विचार बल्कि नैरेशन के स्तर पर भी यह बदलाव का सूचक है हिन्दी कविता की नई पीढ़ी का।

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  4. बहुत सुन्दर है सुषमा जी ....

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  5. समय से सीधा संवाद करती कविता है ...बहुत अच्छी लगी।
    अपने शोध कार्य मे इस्तेमाल करना चाहता हूं.. अनुमति दें !

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