धूप नही है
चौतरफा धूप की ख्वाहिश है
धूप की बातों से जुदा है धूप
जैसे प्यार की बातों से जुदा हो प्यार
उम्मीद से बहुत दूर बदलाव
धूप नहीं है, धूप के इशारे हैं
खिल आये हैं
डेफोडिल, ट्यूलिप्स के साथ साथ
बहुत से रंगबिरंगे खरपतवार
महक उठी है रोज़मेरी
दूर तक पसरी पुदीने की बेल
सिमसिम खुल गयी हैं चेरी, चिनार की कलियाँ
आस और ताप के बीच
बीतता फिर एक बसंत
उम्मीद से बहुत दूर बदलाव
धूप नहीं है, धूप के इशारे हैं
खिल आये हैं
डेफोडिल, ट्यूलिप्स के साथ साथ
बहुत से रंगबिरंगे खरपतवार
महक उठी है रोज़मेरी
दूर तक पसरी पुदीने की बेल
बिखरे हैं धूप के रंग
हरे, बैंगनी, नीले, पीले, लाल, नारंगी
धूप नही है
धूप की बातें हैं , धूप के इशारे हैं
प्यार और उम्मीदआस और ताप के बीच
बीतता फिर एक बसंत
(अपने उपवन की तसवीरें)

धूप, प्यार और उम्मीद की बातों के बीच
ReplyDeleteबीतता फिर एक बसंत
बहुत प्यारी रचना ..
क्या खूबसूरत लिखा है... "धूप नहीं है, धूप के इशारे हैं " सचमुच, इशारे ही तो हैं...!!!
ReplyDeleteचर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 03- 05 - 2011
ReplyDeleteको ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
http://charchamanch.blogspot.com/
sundar kavita hai. badhai.
ReplyDeleteआदरणीय डॉ.सुश्रीसुष्माजी,
ReplyDeleteबहुत बढ़िया,आपको अनेकोनेक बधाई।
"प्यार और उम्मीद
आस और ताप के बीच
बीतता फिर एक बसंत" - बहुत खूब।
आपके उपवन की तस्वींरे भी बढ़िया है।
शुक्रिया।
मार्कण्ड दवे।
http://mktvfilms.blogspot.com
प्रकृति से जीवन को जोड़ती...........सुन्दर रचना
ReplyDeleteधूप नही है
ReplyDeleteधूप की बातें हैं , धूप के इशारे हैं
प्यार और उम्मीद
आस और ताप के बीच
बीतता फिर एक बसंत ....
बहुत कोमल अहसास..बहुत सुन्दर
शुक्रिया आप सबका
ReplyDeletebahut komal aur sunder ehsas.
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