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Nov 11, 2011

बहक

सुनहरी उकाब का एक पंख है
मिट्टी, बारिश, और धूप के रंग है इसमें
खुशबू सुदूर की
पंख है पैना
पंख है टूटा
गीली मिट्टी में बो दूं?
कि लहलहाती  सुनहरी एक झाड़ उग आये 
कि सचमुच ही उस पर बैठ कोई चिड़िया गाये...


8 comments:

  1. अदभुत अनुभूति!

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  2. सुन्दर सुखद

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  3. जरूर बोइये ………ख्वाब कब सच हो जाये क्या पता।

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  4. गीले मन की कच्ची अभिलाषा ....अभिव्यक्ति की उड़ान है तुम्हारी कवितायेँ.....और लिखो.

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