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Jun 15, 2013

वाशिंगटन डी. सी. -01

महीने भर पहले, हफ्तेभर, वाशिंगटन डी. सी. में रहना हुआ.  इस बार  टूरिस्ट वाली हड़बड़ी की जगह इत्मीनान से जानने-देखने का मौका मिला.  इससे पहले, दो दफे यहाँ आना हुआ है, कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो आयीं, अंदाज़ हुआ कि कितना भूल भी गयी हूँ ....

पहली बार  वाशिंगटन डी. सी. पन्द्रह साल पहले,  क्रिसमस के समय आयोवा से १९९८  में आयी  थी.  मेरे  मित्र मनोज और हेमा यहां थे. इन दोनों मित्रों के साथ मैंने नेशनल मॉल व मैमोरियल पार्क में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के स्मारकों को देखा, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ की लैब और बेथेस्डा की टहल की, इधर उधर छिटकी हुयी बर्फ दिखती थी, जो आयोवा के बर्फीले अंधड़ से निकल कर खुशनुमा अहसास था. अब इतने सालों बाद, स्मृति कुछ धुंधला गयी है. अच्छे समय गुजारने, उनके स्नेह की याद है.  आयोवा लौटते समय मनोज ने कहा था कि 'अगली बार चेरी फेस्टिवल के समय आना'.  


ये मौका पांच वर्ष बाद 2003 में मिला, मनोज और हेमा इस बीच भारत वापस लौट चुके थे, मेरा कोर्नेल ज्वाइन करना हुआ, शादी हुयी, और हमारे लम्बी ड्राइव करने के कुछ मौके बने.  इस दफे इथाका से आठ घंटे ड्राइव करते हुए हम ख़ास चेरी फेस्टिवल देखने अप्रैल के महीने में गए.  

चेरी फेस्टिवल का इतिहास काफी दिलचस्प है.  ओर्नामेंटल चेरी के ये पेड़ १९०० से पहले अमेरिका में नहीं थे. जापान से लौटे, अमेरिकन टूरिस्ट, अकसर खिले चेरी के पेड़ों की तसवीरें अपने दोस्तों परिचितों को उत्साह से दिखातें.  1885 में  अमेरिकी पत्रकार एलिजा स्किडमोर ने  जापान में ओर्नामेंटल खिले चेरी के पेड़ देखे, तो उन्हें  इन पोधों को अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डी. सी. लाने का ख्याल आया और कई वर्षों तक वो इसकी मुहीम चलाती रहीं, आर्मी के बड़े अफसरों, और प्रभावशाली लोगों से मिलती रहीं.  इस बीच डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर के बोटनिस्ट, प्लांट एक्स्प्लोरर, डेविड फेयरचाइल्ड ने एक हज़ार चेरी के पेड़ जापान से मंगवाए, उन्हें अपने निजी फार्म में लगाया, और स्कूली बच्चों को उनकी कलमें लगाने के लिए बांटते रहे.  एक ऐसे ही कार्यक्रम में एलिजा स्किडमोर की मुलाकात डेविड फेयरचाइल्ड से हुयी. एलिजा ने नए सिरे से डी. सी.  में बड़ी संख्या में चेरी के पेड़ लागने के लिए जरूरी धन जुटाना शुरू किया और एक ख़त इस सम्बन्ध में फर्स्ट लेडी हेलन टेफ्ट को भी भेजा, जिन्होंने इस प्रस्ताव को समर्थन दिया और प्रोजेक्ट शुरू हुआ.

टोकियो शहर के मेयर युकिओ ओज़ाकी ने  जापान की सदासयता के बतौर  वर्ष 1910 में  वाशिंगटन के लिए दो हज़ार चेरी के पेड़ों की पहली खेप भेजी.  जांच के दौरान इन पेड़ों में कुछ कीड़े और निमेटोड पाए गए, सारे पौधे जलाने पड़े.

दो वर्ष बाद, टोकियो शहर के  प्रसिद्द जापानी केमिस्ट जोकिची तकामीने के सहयोग से तीन हज़ार स्वस्थ चेरी के पेड़ों की दूसरी खेप अमेरिका पहुंची,  जिसे वाशिंगटन डी. सी. में  टाइडल बेसिन के चारों तरफ डेविड फेयरचाइल्ड की देखरेख में रोपा गया.  1965 में 3800 चेरी के पेड़ों की दूसरी खेप जापान से पहुंची जिसे टाइडल बेसिन और नेशनल मॉल व मैमोरियल पार्क में रोंपा गया.  

अब लगभग सौ साल बाद , हर अमेरिकी शहर के लैंडस्केप में ओर्नामेंटल चेरी के पेड़ दिखतें हैं, और लगता है जैसे यहीं के नेटिव हैं ये पेड़.  परन्तु वाशिंगटन डी. सी . के  नेशनल मॉल व मैमोरियल पार्क में प्रसिद्द राष्ट्रपतियों के स्मारकों,  कैपिटल बिल्डिंग, व्हाईट हाउस, लाइब्रेरी ऑफ़ कोंग्रेस, और और एक दर्जन से ज्यादा रास्ट्रीय संग्रहालयों के बीचों-बीच, विजातीय चेरी के फूलों की इस कदर सघन, हतप्रभ करने वाली मौजूदगी  विशेष हैं. 

बसंत उत्सव के तीन दिन सफेद, गुलाबी रंगत के फूलों से लकदक  चेरी के पेड़ों के बीच, पानी में उनकी छाया देखते, संगीत की धुनों के बीच, कुछ नेचुरल हिस्ट्री और स्मिथ सोनियन म्यूजियम्स की टहल करते बीते, और बाक़ी दूसरे म्यूजियम्स और आर्ट  गैलरी देखने की लालसा  के साथ  हम वापस इथाका लौट गयें ......

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