"It seems to me I am trying to tell you a dream-making a vain attempt, because no relation of a dream can convey the dream sensation, that commingling of absurdity, surprise,, and bewilderment in a tremor of struggling revolt, that notion of being captured by the incredible which is of the very essence of dreams. No, it is impossible, it is impossible to convey the life-sensation of any given epoch of one's existence-that which makes its truth, its meaning-its subtle and penetrating essence. It is impossible. We live, as we dream-alone".
------------- Joseph Conrad in "Heart of Darkness"


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Dec 31, 2013

नयी-पुरानी उम्मीदें मुबारक

बहुत दिनों से आधी अधूरी, इधर उधर भागी जाती कुछ पंक्तियाँ, आसपास  डोलती रहीं , २०१३ के आखिरी दिन जितना भी बन पड़ा इन्हे एक जगह दर्ज़ कर रहीं हूँ, आधेअधूरी ही, कि कुछ काम एक बार में ख़त्म नहीं होते, सारे हिसाब आज, इसी समय दुरुस्त नहीं हो सकते, २०१३ का उधार  का परचा २०१४ की कील पर टांग रही हूँ, अतीत और भविष्य के बीच एक सिलसिला बचा रहेगा, उम्मीद बची रहेगी .....



ताज महल

लाल बलुआ-पत्थरों के बीच एक फूल खिला है
ताज महल!

मुगलिया के सपने में तीन सदी तक डोलते रहे होंगे
मिश्र के पिरामिड
उलूग बेग के मदरसे,
समरकंद, हिरात, काबुल के हुज़रें
दिल्ली से दक्षिण तक फैले किलों, मकबरों, महलों में
इन सपनों के अक्स है
मुगलिया की आँखों का भरपूर सपना है
ताजमहल

बीसीयों साल पत्थरों से पटा रहा होगा आगरा शहर
हज़ारों हज़ार पीठ हुयी होंगी पत्थर
हज़ारों हज़ार हाथ हुये होंगे पत्थर,
नक्कास, गुम्बजकारों, शिल्पीयों, के जहन में
क़तरा क़तरा उभरी होंगी महराबें, मीनारें,
चित्रकारों, संगतराशों, पच्चीकारों के उँगलियों के पोरों पर बेल बूटे
बीस हज़ार कारीगरों के आंसुओं के तालाब में खिले होंगे फूल पत्तियां
लिपिकारों के होठों पर आयतें
छलनी छलनी झिर्रियों से हुए होंगे मन
एक तसल्लीबख्श आख़िरी क्षण की आह है 
ताजमहल   


अर्जुमन्दबानो बेगम उर्फ मुमताज महल
कायनात की अजीम सौगातों के बीच
कितने प्यार से रखे हुए हैं तुम्हारे अवशेष
दक्खिनी दरवाजे के जरा सा इधर
सहेली बुर्ज एक में दफ़न हैं  बेग़म अकबराबादी^ 
सहेली बुर्ज दो में फतेहपुरीबेगम^  
क्या मालूम कहाँ मरी खपी
शाही हरम की हूरें
या मुमताज की तीन बेटियों समेत दर्ज़नों कुंवारी शहजादियाँ*
सिर्फ एक शहंशाह का ही विलाप है
ताजमहल
______________
^ शाहजहां की दो बेग़में जो ताजमहल परिसर में ही दफ़न  हैं .
* अकबर ने मुग़ल शहजादियों के विवाह पर रोक लगा दी थी, जो मुमताज की बेटियों के लिए भी रही. 



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