"It seems to me I am trying to tell you a dream-making a vain attempt, because no relation of a dream can convey the dream sensation, that commingling of absurdity, surprise,, and bewilderment in a tremor of struggling revolt, that notion of being captured by the incredible which is of the very essence of dreams. No, it is impossible, it is impossible to convey the life-sensation of any given epoch of one's existence-that which makes its truth, its meaning-its subtle and penetrating essence. It is impossible. We live, as we dream-alone".
------------- Joseph Conrad in "Heart of Darkness"


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Dec 13, 2015

Sapiens: A Brief History of Humankind


It took a while to finish 'Sapiens: a brief history of humankind' (414 pages in total). Nonetheless I enjoyed reading it. I liked the subtitles, the basic outline of the book and the conversational writing style. At points I felt I am sitting in a gossip room. I still prefer Jared Diamonds intimate descriptions and academic approach to human evolution, and agriculture. But I like the later chapters of 'Sapiens' which deal with role of the Empires in history, economy and technology. If you happen to be an expert or scholar in a certain field you feel like the writer is sometimes doesn't really know how to compare facts supported by decades of research vs. whatever is popping out of the head of a layman. But, the scope of the book is vast and summarizes public domain knowledge from a range of disciplines for common readers. Overall it is a great book to read, and I would recommend it.
Some of my favorite one liners from the book.

" There is no way out of the imagined order. When we break down our prison walls and run towards freedom, we are in fact running into the more spacious exercise yard of a bigger prison."

"Not all people get the same chance to cultivate and refine their abilities. Wheather or not they have such an opportunity will usually depend on their place within their society's imagined order."

"All societies are based on imagined hierarchies, but not necessarily on the same hierarchies."
"Every point in history is a crossroads. A single travelled road leads from the past to the present, but myriads paths fork off into the future. Some of those paths are wider, smoother and better marked, and thus more likely to be taken, but sometimes history—or the people who make history-- takes unexpected turn."


"it is an iron rule of history that what looks inevitable in hindsight was far from obvious at the time. Today is no different."

Jul 11, 2015

माउन्ट हुड डायरी -जून २०१५

१५--20  जून २०१५

छह साल पहले बैकयार्ड में चेरी का एक पेड़ लगाया था, जिसमें तीन अलग किस्म के पेड़ों की टहनियाँ ग्राफ्ट की गयीं थीं. चेरी का पेड़ तीन रंग के और तीन स्वाद के कच्चे-पके फलों से लदा है. हफ़्तेभर की हाइकिंग के इरादे से घर से निकलने के लिए, खाने का सामान, पानी, कपडेलत्ते सब पैक हो गए हैं. रास्ते के लिए पकी चेरी तोड़ ली और कच्ची पक्षियों के लिए छोड़ दी, मालूम है जब तक लौटकर आना होगा, चेरी का पेड़ खाली हो जाएगा।

आज अच्छी धूप वाला दिन है,  करीब 62 F टेम्प्रेचर.  दो घंटे की ड्राइव के बाद हम 'स्वीट टॉमेटोज़', पोर्टलैंड में लंच के लिए रुके और फिर सीधे माऊंट हुड के लिए रवाना हुए.  कई वर्षों से पोर्टलैंड आते जाते और फ़्लाईट से माउन्ट  हुड को दूर से देखते रहे और हर बार नज़दीक से देखने की इच्छा होती थी.  माउन्ट हुड, ऑरेगन की सबसे ऊंची (~ 11,249 फ़ीट)  पर्वतश्रेणी है, और कई ज्वालामुखियों की भूमी कैस्केड पर्वतश्रृंखला का हिस्सा है.  ड्राइव करते हुये कई कोणों से हमें अल्पाइन फारेस्ट के बीच माउन्ट  हुड, माउन्ट सेंट हेलेंस, माउन्ट एडम, और माउन्ट जेफ़रसन के दर्शन होते रहे. रास्ते में 'रोडोडेंड्रन' नाम का गाँव दिखा, और जंगल के बीच में अनायास सफ़ेद  और गुलाबी फूलों वाले बुराँश दिखते रहे.  कुछ वर्ष पहले एक नर्सरी से लाल हिमालयी बुराँश का पेड़ ख़रीद रही थी तो वहीं एक माली ने मुझे कैस्केड के जंगलों में फैले बुराँश के बारे में बताया था.
  
तीन बज़े  हम माउन्ट  हुड के बेस गवर्नमेंट कैंप पहुंचे, और इंफॉर्मेशन सेंटर से मैप और जानकारी ली.  पहले हम  ट्रिलियम लेक पहुंचे, जहाँ डगलस फ़र  और शिकोया के आकाश को छूतें पेड़ों के बीच कैंपिंग साइट्स हैं.  यहाँ घने दरख़्तों के बीचों बीच रहरह कर तम्बू और सुलगती हुई ग्रिल दिखी , आसपास दौड़ते बच्चे दिखते रहे.   गाड़ी पार्क करके हम मुख्य ट्रैक से झील के किनारे किनारे चलते चले गए .  झील के चारों तरफ घना जंगल है, कई रस्ते बीच में निकलकर जंगल की तरफ और कैंपिंग साइट्स की तरफ जाते हैं. पूरे रास्ते कुछ कुछ दूरी पर बड़ी बड़ी चट्टाने रखीं हैं जिनका वहां होना सुखद संयोग ही जान पड़ता है, हालाँकि किसी ने बहुत सोच समझकर इस लैंडस्केप में उन्हें तरतीब से रखा होगा. इस इलाके में कई तरह की वनस्पतियाँ है, पॉइज़न ओक और पॉइजन आईवी,  बुराँश, जंगली चेरी, हेमलॉक, बाँझ, हेज़लनट, और कई जंगली फूल, जंगली घास. हज़ारों फूल एक सफ़ेद गुच्छे में खिले सफ़ेद गुंबद जैसे पहली बार देखे. बाद में मालूम हुआ कि ये बेयर ग्रास है, जो ६००० फ़ीट से ९००० फ़ीट की ऊंचाई में यहाँ उगती है और यहीं की नेटिव वनस्पति है.  मेरे बैग में मार्खेज़  का 'वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सोलिट्यूड' है,  जिसे बीच बीच में पढ़ रही हूँ. बेयर ग्रास का एक फूल इसी के भीतर रख लिया है.  बहुत सारे लोग झील में तैर रहे हैं, कुछ  नाव में हैं. एक यहूदी जोड़ा हमसे आते जाते तीन चार बार मिला, दोनों अधेड़ हैं, औरत गोल मटोल है, और सफ़ेद क्रोशिया की बनी धार्मिक टोपी, और हलके नीले रंग की स्कर्ट पहने है, जो आमतौर पर ऑर्थोडॉक्स यहूदी औरतें पहनती हैं.  आदमी के पास बड़ा सा ट्राइपॉड है, एक बहुत बढ़िया कैमरा, और काफी तबियत से फोटो खींचने में लगा है.  हमारी एक पारिवारिक फोटो भी उसी ने खींची.

मार्श के बीचोंबीच रंग, ब्रश और कैनवश लिए एक औरत बीहड़ में अकेली निश्चिन्त होकर लैंडस्केप पेंट कर रही है.  झील का एक किनारा जलकुम्भीयों से भरा है, एक तरफ दलदल और मार्शलैंड है,  एक तरफ  बर्फ़ से ढका माऊंट हुड और विपरीत दिशा में डूबता हुआ सूरज है.  लेक के बीचों बीचमाऊंट हुड की डोलती हुई रोशन परछांई है. पानी में सूरज और पहाड़ दोनों का ख़ेल  चल रहा है. हम लगभग अंदाज़ से चलते रहे और बिना योजना के ही झील की ढाई मील की परिक्रमा कर ली  और फिर पार्किंग लॉट  में पहुँच गए.

आजकल रात नौ बजे तक रोशनी रहती है, डूबते सूरज का आनंद लम्बे समय तक लिया जा सकता है,  हम ट्रिलियम लेक से निकल कर हम व्हाइट रिवर स्नो पार्क पहुंचे। यहाँ  सर्दियों में ख़ासकर बच्चे स्लेजिंग करते हैं.  अभी यहाँ बर्फ़ नहीं है, और नदी सफ़ेद झाग की एक संकरी नाले सी जान पड़ती हैं. नदी के दोनों किनारे भुरभुरी ज्वालामुखी की राख़, लावा पत्थरों से भरे हुए हैं. नदी पर जो पुल है वो अभी पांच साल पहले बना है,  पुराना पुल  २००६ में ढह गया था. सर्दी के महीनों में जब यहाँ कई कई दिनों तक बारिश होती है, तो नदी उफनती हुई विकराल हो जाती है, उसके साथ बड़ी मात्रा में माउन्ट  हुड से पत्थर, राख, और बड़े बड़े पेड़ बहते हुए आते हैं, और पुल  से टकराते रहते हैं.  यहाँ एक सूचनापट्ट लगा है जिसमें नए पुल  के डिजायन सम्बन्धी जानकारी है .  अभी लगभग चारों तरफ सिर्फ राख और पत्थरों का स्लेटीपन है, सौ वर्ष पहले हुए ज्वालामुखी विस्फोट के बाद का मंजर जस का तस है, जैसे कल की बात हो.  प्रकृति की क्रूरता  लगता है अनंत तक पसरी है , उसके वृहत्तर विनाश को तमाम साधनों के बाद भी मनुष्य अनडू नहीं कर सकते हैं,  वो उसका हिस्सा ही बन सकते हैं, सिर्फ साक्षी बन सकतें हैं.

धीरे-धीरे लोग वापस घर लौट रहे हैं,  पक्षी अपने घोंसलों में, हम गवर्नमेंट केम्प के इलाके में जहाँ गिनकर दो-तीन रेस्ट्रोरेन्ट हैं और समय से नहीं पहुंचे तो शायद बंद हो जाएंगे, खाना नहीं मिलेगा.


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माउन्ट हुड के बेस में, लगभग ४००० फ़ीट की ऊंचाई पर गवर्नमेंट केम्प नाम की जगह  है जहाँ हम रुके हुए है, यहाँ दो सौ से कम लोग रहते हैं और यहाँ से माऊंट हुड करीब ८ किमी. दूर है.  बीच बीच में कई छोटे छोटे गाँव इस इलाके में पड़ते हैं, जहाँ कई वाइनरीज़ हैं, और ये इलाका फिर कोलंबिया रिवर गोर्ज के इलाके से जुड़ जाता है.  उन्नीसवीं सदी के आख़िरी सालों में सम्भवत: अमेरिकी आर्मी का एक दल यहाँ से गुजरा था, जो अपने पीछे कुछ सामान यहाँ 'गवर्नमेंट प्रॉपर्टी ' लेबल करके छोड़ गया था.  कई वर्षों बाद कुछ सेटलर्स इस इलाके में आये तो उन्होंने इस छूटे हुए सामान को देखा और इस जगह का नाम गवर्नमेंट केम्प रख दिया. अमेरिका के पूर्वी भाग की तुलना में पैसिफिक नार्थवेस्ट में लोग लगभग दो सदी बाद बसने शुरू हुए, और अब भी यहाँ की आबादी अपेक्षाकृत कम है. यहाँ का बहुत सारा भूभाग जस का तस बचा हुआ है, नेचर बिना टेम किया हुआ, अपने अप्रितम सौंदर्य और पूरी विभीषिका के साथ दिखता है.

 जिस होटल में हम रुके हैं, वहां तीन बुजुर्ग गुजराती जोड़े भी ठहरे हुए हैं, पूरा ग्रुप मेरीलैंड से घूमने के लिए आया है.  ये लोग हमें सुबह नास्ते की टेबल पर मिले और बहुत आत्मीयता से मिले, जैसे कोई पुरानी जान पहचान हो.  इस तरह के अपरिचितों का सिर्फ भारतीय होने के नाते थोड़ी देर को ही सही अच्छा लगता है, मैं  अक्सर सोचती हूँ मेरे बच्चों और दुसरे बच्चे जो यहाँ बड़े हो रहे हैं, इन सब बातों का उन पर क्या असर होता होगा, शायद एक सूत्र उन्हें भारतीय लोगों से बांधता होगा. गुजराती लोग अन्य भारतीय लोगों के मुक़ाबिले शायद बहुत पहले से पारिवारिक दोस्तों के साथ मिलकर घुमते हैं. नैनीताल में हम साल के कुछ महीनों को कुछ यूं भी पहचानते थे, बंगाली, गुजराती और मारवाड़ी टूरिस्ट सीज़न. पिछले कई वर्षों में अमेरिका में भी मैंने बहुत से गुजराती परिवारों को उसी परंपरा में घुमते देखा है, कई दफ़े गुजराती मित्रों को भारी संख्या में पोहा, ढोकला, नमकीन, और बड़ी मात्रा में साथ खाना बनाकर ले जाते भी देखा है.

आज हमारे पास पूरा लम्बा दिन है, जब तक जान रहेगी, घुमते रहेंगे के इरादे से निकले हैं. गुजराती दोस्तों की तरह हमारे पास खाने पीने का घर से बनाया सामान नहीं है लेकिन, सबके पास अपनी पानी की बोतल है, मेरे पास कुछ चने मुरमुरे, फल, नमकीन और सूखे मेवे हैं, हम इसी को खाकर लंच की छुट्टी करेंगे.

 गोर्वेनमेंट केम्प में ही एक छोटे से तीन मंजिले मकान में इंफोर्मेशन सेंटर और म्यूजियम है, वहां की एक मात्र कर्मचारी एक महिला है, निचली मंजिल में कई तरह की सूचना वाले पैम्प्लेट्स, पोस्टर्स और मैप्स हैं.  बेसमेंट में पिछले दो सौ वर्षों में इस्तेमाल किये जाने वाले स्की इक्विपमेंट्स, जूते, मोज़े, पुराना टेलेफोन, बर्तन आदि हैं, कुछ अच्छे स्केच भी हैं. ऊपर की मंजिल में एक कमरे में लैंडस्केप पेंटिंग्स हैं, बाक़ी में पोस्टर्स, सूचनाएं, इतिहास-भूगोल, इलाके की कुछ चिड़िया, कयोटी, भालू, हिरन आदि के नमूने.  यहाँ हमें बहुत सहेजकर रखा हुआ इस क्षेत्र में पाये जाने वाले पौधों, फूलों आदि का हर्बेरियम फ़ाइल भी मिलीं.  एक दूसरी फ़ाइल में अलग-अलग किताबों के कुछ हिस्से ज़ेरोक्स करके लगे हैं, जहाँ माउन्ट हुड का ज़िक्र है.  इसी फ़ाइल में नेटिव अमेरिकी मिथकों का सारांश भी है.

गवर्नमेंट केम्प से ड्राइव करके हम टिम्बरलाईन लॉज़ तक पहुँचे. यहाँ से सीधे ट्रॉली मिलती है जो सात या दस हज़ार फ़ीट तक लेकर जाती है, लेकिन हमने पैदल जाना ही तय किया, खेल खेल में ये सोचा कि जहाँ तक जा सकेंगे जाएंगे, जब बस का नहीं रहेगा तो लौट आएंगे.  पूरा रास्ता और पूरा पहाड़ लावा रॉक्स  और ज्वालामुखी की राख और पत्थरों के चूरे से भरा है. कुछ टेक्स्चर में लगता है कि आप लगतार रेत में चल रहे हैं, और ऊपर चढ़ते हुए कभी भी फ़िसल सकते हैं. पूरे रस्ते में सीधी चढ़ाई है, बहुत गड्ढ़े नहीं हैं,  और जगह जगह पर बड़ी बड़ी चट्टानें हैं जो शायद इस पहाड़ के बने रहने का सहारा हैं.

इस रेत और राख़ में ही अब सौ बरस बाद तरह के बहुत छोटे छोटे, बहुत नाज़ुक फूलों वाले पौधे उगे हुये हैं.  इस कठोर, लगभग जले हुये लैंडस्केप को संवारने और बचाने में सिर्फ़ यही नाज़ुक पौधे ही सक्षम हैं.  बहुत तेज़ धूप है, लेकिन ठंडी हवा चल रही है. मालूम नहीं पत्थरों और राख के बीच कैसे ये फूल खिल रहे हैं.  ये बात मैं अपने बेटे से कहती हूँ तो, वो अपनी ज़ेब  से लेदरमेन निकालकर कुछ देर जमीन कुरेदता है, फिर कहता है कि इस रेत  के ढाई इंच नीचे नमी है,  सिर्फ सतह  को देखकर निष्कर्ष न निकालूँ, सरप्राइज़ न होऊं.  ये भीतरी नमी ही जीवनदायिनी है.

पिछले वर्ष मैं अस्कोट -आराकोट अभियान में आठ-दस दिन चली थी, तो मुझे ये अहसास हुआ कि मेरी चलने की रफ़्तार बाक़ी सभी लोगों से कम है, बहुत धीमीं है, और अपेक्षाकृत मुझे थकान ज़्यादा लगती है. यहाँ भी दो छोटे बच्चे और पंकज आसानी से चढ़ते गए, मुझे बीच बीच में रुकने की ज़रुरत पड़ी.  बीस पच्चीस साल पहले मैं किसी के भी साथ चलती थी तो लोग यही कहते थे "धीरे चल".  पता नहीं फिर इतने वर्षों में क्या हुआ,  मुझे खुद भी मालूम नहीं पड़ा कि कब मैं इतनी धीरे चलने लगी, और उसमें भी हाफ़ने की जल्द नौबत आ जाती है.

धीरे-धीरे चलते हुए हम ७००० फ़ीट तक पहुँच गए.  यहाँ  इस वक़्त स्कीइंग  हो रही थी. माउन्ट  हुड में पूरे सालभर लोग स्कीइंग के लिए आते हैं. सर्दी के महीनों में गवर्नमेंट केम्प तक बर्फ़ रहती है, एक साथ कई जगह लोग स्कीइंग करते दिखतें हैं. गरमी के मौसम में सिर्फ ७००० फ़ीट के ऊपर बर्फ बचती है और लोग वहां स्कीइंग करते हैं.  लगभग ३००० फ़ीट की चढ़ाई में हमें करीब तीन घंटे  का समय लगा.

बच्चे बर्फ़ घंटेभर खेलते रहे,  और मैंने  मार्ख़ेज़ की क़िताब 'वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सोलीट्यूड'  के १०० पेज़ पढ़े.  दूसरी बार अब बीस वर्ष बाद फिर इस किताब को पढ़ रही हूँ. उपंन्यास का वितान खुश करने वाला है.  पीढ़ी-दर -पीढ़ी,  फिर फिर वही वही नाम, वही वही नाम किसी की भी स्मृति के लिए टेस्ट हैं.  एक मायने में सभी मर्द एक ही खाके में ढले हैं, उपन्यास में एक जगह ये बात आती भी है  जब उर्सुला कहती है कि जब तक इन्हे पलों पोषों तक तब सब ठीक रहता है, उसके बाद फिर सब एक तरह के बस से बाहर (एक तरह से बर्बाद) हो जाते हैं.  उपन्यास के स्त्री चरित्र अपेक्षाकृत विविधता लिए हैं और एक दुसरे के समान्तर है, कुँआरी लड़कियां, पत्नी, रखैल, और वेश्याएं.  लेकिन हर एक की अपनी गरिमा है, कोई चीप नहीं है.  हर एक के भीतर धड़कता दिल है, जिद्द है , दिमाग है, और अपना अनोखापन है.  उर्सुला और पिनार दोनों सौ बरस से लम्बी उम्र जी गयीं औरतें  दो हीरोइनें हैं पूरे नावेल की. बाक़ी कोई हीरो नहीं है. उर्सुला का अतुलनीय जीवट है और वो सबसे ज्यादा रूटेड कैरेक्टर है, कथा की मैट्रियार्क.  पिनार वेश्या है, मातृत्व से भरी,  उदार, और प्रज्ञा संपन्न.  उर्सुला और पिनार में से कोई असहाय नहीं, कोई वक़्त का विक्टिम नहीं , दोनों अपने जीवन के और कई  दुसरे जीवनों के सम्बल है।  इसी तरह जिजीविषा, अभिमान और जेनरोसिटी से भरी रखैल पेरे कोटेस है.  और फिर फरनादा है, पढ़ी लिखी, माता-पिता के दुलार में पली,  सीरतोंवाली, बला की खूबसूरत,  लेकिन सबसे ज्यादा मूढ़, सबसे कम सह्रदय.  क्या होता गर फरनादा की किस्मत उसे गृहस्थन की बजाय कोई कलाकार बनाती, कोई प्रीस्ट, पुरुष बुद्धिजीवीयों के हिस्से जैसा जीवन आता है कुछ वैसा कुछ,  तब फिर उसकी ताब का पता चलता. औरतों की समाज में जितनी जगह है वो घर के भीतर ही है, पढ़लिखकर उनका कुछ नहीं होता, जैसे फर्नाडा, मेमे और अमानतारा उर्सुला का.  रेबेका , और अमान्तारा का भी. 
 पुरुषों में जोश अर्केडियो बुएंदा और कर्नल औरिलियनों और औरेलियनों जोश के तफ़सीलें हैं, बाक़ी सब जन्म और मरण के चक्र का हिस्सा है. एक बाद दुहराव का रीइन्फोर्समेंट, और जातीय स्मृति को कहने की बेहद प्रभावी टेकनीक का हिस्सा, कई उपकथाओं को बाँधने के सूत्र: एक पागल आदमी की कथा, बनाना कम्पनी की कथा, गृहयुद्ध की और संधियों की कथा, जिप्सियों की कथा.   

इस वीराने में इतनी सघनता के साथ इन किस्सों में उतरने का आनंद, माउन्ट हुड की चोटी  के बहुत करीब बैठे, दक्षिण अमेरिका के किसी समंदर में डूबते देश की कथाएं -उपकथाएं. स्मृति को गूंथने के इतने अनोखे प्रयासों के बाद आखिर में फिर स्मृतिलोप की दुनिया है, जैसे कभी कुछ वहां था ही नहीं.

माउन्ट हुड में भी अब शाम हो गई है, ट्रॉली  बंद, स्कीइंग  बंद, अब सब शोर ख़त्म .............

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माउन्ट हुड  से लौटकर टिम्बरलाईन लॉज में हमने कुछ समय बिताया। १९३० के दशक में ग्रेट अमरीकन डिप्रेशन के समय बनी इस शानदार इमारत में घुमते रहे. प्रेजिडेंट रूज़वेल्ट ने इस इमारत का उद्घाटन किया था और स्थानीय लकड़ी और पत्थर से बनी ये इमारत बहुत खूबसूरत है, इसकी ढालदार छते लाज़बाब कर देने वाली हैं, वैसा ही लकड़ी का काम है, और ७५ वर्ष बीत जाने पर भी बहुत कायदे का रखरखाव है. 

रात हुई, थकान ने घेरा,  दूसरे दिन पैर दुखते रहे, सांस फूलती रही., एकबार लगा बहुत हुई घुमाई वापस घर चलें,  लेकिन फिर हिम्मत बांधी, मन का घोड़ा जब तक दौड़ सकेगा,  आगे जाने की हिम्मत भी लौट लौट आयेगी ही.… 

पुरानी मित्रता की छाँव में दो दिन रेडमंड, वाशिंगटन में आलोक और मौली के सानिंध्य में बीते, वहां पहुंचे तो शाम को स्नोकवाल्मी फॉल्स (Snoqualmie Falls) गये, १०० फ़ीट ऊपर तक झींसी सी पानी की बूंदे हमारे ऊपर गिर रहीं थीं, बारिश का सहज भरम. अलगे दिन सुबह फिर मेरीमूर पार्क, होते हुए सीमीश नदी के किनारे तीन घंटे चलते रहे. नदी के साफ़ पानी में दूर दूर तक सफ़ेद जलकुम्भियां खिली हैं,जिनके पुंकेसर गहरे पीले रंग के हैं, पार्क के भीतर कॉटनवुड के पेड़ों पर कई कई घोसलों में ब्लू हेरॉन पक्षी अपने चूज़ों के साथ हल्ला कर रहे हैं.  मेरीमूर पार्क के बाद हम घटेभर चिड़ियों के लिए सुरक्षित ऑडोबान ट्रेल एमीन घुमते रहे, बीच बीच में हिसर टूँगते हुए. 

फिर 'चाट' नाम के भारतीय रेस्टोरेंट में भोजन, और शाम समुद्र तट पर बिताई। छुट्टी के पांच दिन ख़त्म हुए.





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May 14, 2015

A Botanist's soliloquy on a spring morning


I have been here for six years,
Yet, so much had remained unnoticed:
A tiny pocket garden laced with ferns, blooming azaleas, and rhododendrons,
Tall trees of heaven,
Chestnut with white flowers, and its cousin red-flowering horse chestnut,
Lindens hidden behind hemlock,
Star Wars magnolia, and junipers,
Black alder, scarlet oaks,
Sweet gum, sour gum, black gum,
And Mt. Fuji’s flowering cherry—all right here.
Who can say that they have origins in different continents?
They seem to have been here forever,
Standing tall together.
Their branches swinging, and caressing each other
The wind is just a medium.
So is the soil underneath, and troops of ants,
And small, chirping birds going by.

All winter long,
The rows of dozens of dark, denuded elms, standing on both sides of a tiny path
Appear as a work of a master sculptor
Today, on this pleasant spring morning,
I am feeling the sandy texture of their newly unfurling leaves,
Smelling the scent of coarse bark,
Guessing the breadth of the canopy above.
For a moment, I look like a tiny shadow of an unknown elm tree.
I am a bit alien here, and a bit familiar.
I am in a friendly company, yet my solitude assured
As are Mugo pine, Scots pine, Bhutan pine with ponderosa pine.
The curved lines, the colors, and the scents remind me
Of something that I have lost on the way,
Of the things and tales I had forgotten.
Here, the edges merge, origins merge
Corvallis, at the edge of the Pacific coast has become my home.