कई सालो से पेम के काम बे बारे मे, पढ़ती -पढाती आ रही हूँ। एक वैज्ञानिक के बतौर ही नही पेम के लिए एक इंसान के बतौर भी मेरे दिल मे बहुत जगह है। पिछले महीने, पेम और रौल के साथ कुछ समय बिताने का वक़्त मिला, विज्ञान के अलावा, वैज्ञानिको के ब्लॉग लेखन पर भी बात चली, और इस बाबत पेम पहली नामी वैज्ञानिक है जिन्होंने ब्लॉग लेखन को गंभीरता से लिया है। उनके ब्लॉग का नाम उनकी चर्चित किताब जो हाल मे ही लिखी गयी है, के नाम पर है, "कल का भोजन" यानी Tomorrow's table. This is the link for her blog.
आधुनिक और परम्परागत खेती और GMO food, society, पर केंद्रित किताब, "Tomorrow's Table", जिसे पेम और उनके किसान पति ने जो ओरगेनिक खेती के बड़े पैरोकार है, बेहद रोचक ढंग से लिखा है। सामान्यजन की भाषा और सारोकारों पर लिखी ये किताब सचमुच पढ़ने लायक है।
पेम और राउल का पब्लिक लेक्चर , जो कुछ दिन पहले सुनने का मौका मिला, उसकी slide यहाँ पर है. हिन्दी जगत मे तकनीकी और विज्ञान को लेकर जो उथली समझ है, और उस पर सामाजिक सारोकार के नाम पर जो अधकचरा जलसा है, शायद उससे उबरने का कोई रास्ता भी निकल सके, इस तरह की सामग्री अगर ब्लॉग पर मिलने लगे।
किताब और इस मुलाक़ात पर फ़िर कभी ......
फिलहाल विज्ञान और समाज से विज्ञान के रिश्ते को लेकर सजग रहने वालो को पेम का ब्लॉग ज़रूर पढ़ना चाहिए।
"He is an emissary of pity and science and progress, and devil knows what else."- Heart of Darkness, Joseph Conrad
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